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52 शक्तिपीठ

सावित्री (कुरुक्षेत्र)

52 शक्तिपीठ में क्रम 25 — थानेसर, कुरुक्षेत्र, हरियाणा

सावित्री (कुरुक्षेत्र)

सावित्री (भद्रकाली)

📍 थानेसर, कुरुक्षेत्र, हरियाणा

🛕 पीठ-परिचय

व्यापक प्रचलित मान्यता
देवी (शक्ति) रूपसावित्री (भद्रकाली)
भैरवस्थाणु
गिरा अंग/आभूषणदक्षिण गुल्फ (टखने का भाग)
आधुनिक स्थानथानेसर, कुरुक्षेत्र, हरियाणा
देशभारत

📖 इस पीठ की कथा

परंपरागत / पौराणिक कथा

मान्यता है कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में सती के दाहिने पैर का गुल्फ गिरा — पीठ-स्थान देवीकूप भद्रकाली मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। भैरव स्थाणु कहलाते हैं; थानेसर नगर का नाम ही स्थाण्वीश्वर (स्थाणु-ईश्वर) से बना माना जाता है। स्थानीय परंपरा पीठ को महाभारत से जोड़ती है — कहा जाता है कि पांडवों ने युद्ध से पूर्व यहाँ देवी की उपासना की; इसी स्मृति में मन्नत पूर्ण होने पर मिट्टी-धातु के अश्व अर्पित करने की अनोखी रीति चली आई है।

🪔 मूल शक्तिपीठ-कथा (सती–दक्ष-यज्ञ प्रसंग) पढ़ें

परंपरागत (पौराणिक) कथा के अनुसार प्रजापति दक्ष की पुत्री सती ने पिता की इच्छा के विरुद्ध शिव का वरण किया। दक्ष ने एक महायज्ञ रचा, जिसमें सभी देवता आमंत्रित हुए — पर शिव और सती को नहीं बुलाया गया। सती बिना निमंत्रण पितृगृह गईं, जहाँ दक्ष ने भरी सभा में शिव का घोर अपमान किया। पति-निंदा सुनकर सती ने उसी यज्ञ-वेदी के समक्ष योगाग्नि में अपनी देह त्याग दी।

सती के देह-त्याग का समाचार पाकर शिव का शोक प्रलय बन गया। वीरभद्र ने दक्ष-यज्ञ का विध्वंस किया, और शिव सती का पार्थिव शरीर कंधे पर उठाए तीनों लोकों में तांडव करने लगे। सृष्टि का संतुलन डगमगाने लगा, तब विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को विभक्त किया।

मान्यता है कि सती के अंग और आभूषण जहाँ-जहाँ पृथ्वी पर गिरे, वे स्थान "शक्तिपीठ" बन गए — प्रत्येक पीठ पर देवी एक विशिष्ट रूप (शक्ति) में और शिव एक विशिष्ट भैरव रूप में रक्षक होकर विराजे। इस प्रकार शक्तिपीठ-परंपरा पूरे भारतवर्ष — और उसके पार पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, तिब्बत, श्रीलंका तक — को एक देवी-देह के रूप में देखती है।

✨ महत्व

धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र का पीठ; देवीकूप भद्रकाली मंदिर और अश्व-अर्पण की लोक-रीति।

सभी विवरण परंपरागत/पौराणिक मान्यता के रूप में प्रस्तुत हैं। सूचियाँ ग्रंथ-परंपराओं (51/52/108) में भिन्न मिलती हैं; विवादित पहचान स्पष्ट अंकित है। आचार्य-समीक्षा लंबित।

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