सनातन ज्ञान
ज्ञान संसार
गुरु परंपरा

परंपरा प्रणाली

चार आम्नाय पीठ, दशनामी संन्यास-परंपरा, देव-परिचय और परंपरा की संख्याएँ — एक ही स्थान पर

चार आम्नाय पीठ

परंपरा अनुसार आदि शंकराचार्य ने चार दिशाओं में चार पीठ स्थापित किए — प्रत्येक एक वेद और एक महावाक्य से संबद्ध (परंपरागत विवरण)।

दक्षिणाम्नायपरंपरागत मान्यता

श्रृंगेरी शारदा पीठ

श्रृंगेरी, कर्नाटक

संबद्ध वेद

यजुर्वेद

महावाक्य

अहं ब्रह्मास्मि

मैं ब्रह्म हूँ (बृहदारण्यक उपनिषद्)

परंपरा अनुसार आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित दक्षिण दिशा का पीठ (परंपरागत विवरण)।

पश्चिमाम्नायपरंपरागत मान्यता

द्वारका शारदा पीठ

द्वारका, गुजरात

संबद्ध वेद

सामवेद

महावाक्य

तत्त्वमसि

वह तू ही है (छान्दोग्य उपनिषद्)

पश्चिम दिशा का पीठ, "कालिका पीठ" नाम से भी उल्लेख (परंपरागत विवरण)।

पूर्वाम्नायपरंपरागत मान्यता

पुरी गोवर्धन पीठ

पुरी, ओडिशा

संबद्ध वेद

ऋग्वेद

महावाक्य

प्रज्ञानं ब्रह्म

चेतना ही ब्रह्म है (ऐतरेय उपनिषद्)

पूर्व दिशा का पीठ — जगन्नाथ क्षेत्र में स्थित (परंपरागत विवरण)।

उत्तराम्नायपरंपरागत मान्यता

ज्योतिर्मठ (जोशीमठ)

चमोली, उत्तराखंड

संबद्ध वेद

अथर्ववेद

महावाक्य

अयमात्मा ब्रह्म

यह आत्मा ब्रह्म है (मांडूक्य उपनिषद्)

उत्तर दिशा का पीठ — बद्रिका क्षेत्र से संबद्ध (परंपरागत विवरण)।

दशनामी संन्यास परंपरा

दशनामी परंपरा में संन्यासियों के दस नाम-वर्ग हैं — प्रत्येक एक साधना-भाव का सूचक (परंपरागत विवरण)।

गिरि

पर्वतवासी — पर्वत जैसी अडिग साधना का भाव

पुरी

नगर/पूर्णता — ज्ञान से पूर्ण होने का भाव

भारती

विद्या/वाणी — सरस्वती (भारती) से जुड़ा नाम

सरस्वती

ज्ञान-प्रधान — विद्या की साधना का भाव

तीर्थ

तीर्थवासी — तीर्थ जैसे पवित्र जीवन का भाव

आश्रम

आश्रमवासी — संन्यास आश्रम की निष्ठा

वन

वनवासी — वन में साधना करने वाले

अरण्य

गहन वन के साधक — एकांत साधना का भाव

पर्वत

पर्वत क्षेत्रों के साधक

सागर

सागर तट के साधक — सागर जैसी गंभीरता का भाव

देव-परिचय

श्री शिव

महादेव

शैव परंपरा में शिव परम तत्व माने जाते हैं। नीलकंठ, महादेव, अर्धनारीश्वर आदि अनेक नाम-रूपों में उपासना होती है।

प्रतीक: लिंग, त्रिशूल, चंद्र

श्री लक्ष्मी

श्री — शोभा और समृद्धि की देवी

लक्ष्मी श्री (शोभा, समृद्धि) की देवी मानी जाती हैं। वे विष्णु की शक्ति हैं। वैदिक धारा में श्रीसूक्त इनसे संबद्ध है।

प्रतीक: कमल, कलश, स्वर्ण

श्री सरस्वती

विद्या और कला की देवी

सरस्वती विद्या, संगीत, कला और वाणी की देवी मानी जाती हैं। श्वेत वस्त्र, वीणा और हंस इनके प्रतीक हैं।

प्रतीक: वीणा, पुस्तक, हंस

श्री विष्णु

जगत के पालनकर्ता

वैष्णव परंपरा में विष्णु परम तत्व माने जाते हैं — सृष्टि के पालनकर्ता। गीता के अनुसार धर्म की ग्लानि होने पर वे अवतार लेते हैं; राम और कृष्ण प्रमुख अवतार माने जाते हैं।

प्रतीक: शंख, चक्र, गदा, पद्म

श्री राम

मर्यादा पुरुषोत्तम

श्री राम विष्णु के अवतार माने जाते हैं (वैष्णव परंपरा)। आदर्श पुत्र, राजा और पति के रूप में पूजित। वाल्मीकि रामायण इनकी जीवन-गाथा है।

प्रतीक: धनुष-बाण, मुकुट

श्री कृष्ण

योगेश्वर — गीता के उपदेशक

श्री कृष्ण विष्णु के अवतार माने जाते हैं (वैष्णव परंपरा)। उन्होंने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। प्रेम, ज्ञान और कर्म के आदर्श।

प्रतीक: बांसुरी, मोरपंख, सुदर्शन चक्र

श्री गणेश

विघ्नहर्ता — प्रथम पूज्य

गणेश जी शिव-पार्वती के पुत्र माने जाते हैं। परंपरा में हर शुभ कार्य का आरंभ इनके स्मरण से होता है; बुद्धि के देवता माने जाते हैं।

प्रतीक: मोदक, अंकुश, मूषक

श्री हनुमान

राम-भक्त

हनुमान जी श्री राम के परम भक्त माने जाते हैं — शक्ति, भक्ति और विनम्रता के आदर्श।

प्रतीक: गदा, ध्वजा

श्री दुर्गा

आदिशक्ति — जगदम्बा

शाक्त परंपरा में दुर्गा परम शक्ति मानी जाती हैं। देवी महात्म्य में महिषासुर-वध की कथा है; नवरात्रि में नौ रूपों की उपासना होती है।

प्रतीक: त्रिशूल, सिंह, चक्र

श्री सूर्य

प्रत्यक्ष देवता

सूर्य देव को परंपरा में प्रत्यक्ष देवता कहा गया है। सौर परंपरा में इनकी उपासना का स्वतंत्र स्थान रहा है; सूर्य नमस्कार इनसे जुड़ी प्रसिद्ध अभ्यास-परंपरा है।

प्रतीक: रथ, सात घोड़े, कमल

श्री कार्तिकेय

देव सेनापति

कार्तिकेय शिव-पार्वती के पुत्र और देव-सेना के सेनापति माने जाते हैं। दक्षिण भारत में मुरुगन नाम से व्यापक उपासना (क्षेत्रीय परंपरा)।

प्रतीक: भाला (वेल), मोर

श्री ब्रह्मा

सृष्टिकर्ता

ब्रह्मा जी सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं। चार मुख चारों वेदों के प्रतीक माने जाते हैं। पुष्कर (राजस्थान) का ब्रह्मा मंदिर प्रसिद्ध है।

प्रतीक: कमल, वेद, कमंडल

संख्या में परंपरा

हर संख्या-कार्ड बताता है कि वह क्या गिनती है और किस परंपरा से आती है।

3

त्रिमूर्ति

3 रूप — ब्रह्मा (सृष्टि), विष्णु (पालन), शिव (संहार)। स्रोत: पौराणिक परंपरा।

4

वेद

4 वेद — ऋग्, यजुः, साम, अथर्व। स्रोत: श्रुति परंपरा।

6

दर्शन

6 आस्तिक दर्शन — न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा, वेदांत। स्रोत: शास्त्र परंपरा।

7

सप्तपुरी

7 मोक्षदायिका नगरियाँ (परंपरागत मान्यता) — अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार (माया), काशी, कांची, अवंतिका, द्वारका।

7

वाल्मीकि रामायण के कांड

वाल्मीकि रामायण — 7 कांड (बाल से उत्तर तक)। स्रोत: वाल्मीकि रामायण की परंपरागत संरचना।

9

नवग्रह / नवरात्रि

9 ग्रह (ज्योतिष परंपरा) और देवी के 9 रूप — नवरात्रि के 9 दिन (शाक्त परंपरा)।

12

ज्योतिर्लिंग

12 ज्योतिर्लिंग — शिव के प्रमुख लिंग-स्थल। स्रोत: शिव पुराण की परंपरागत सूची।

16

संस्कार

16 संस्कार — गर्भाधान से अंत्येष्टि तक। स्रोत: गृह्यसूत्र/स्मृति परंपरा (सूचियों में भेद मिलता है)।

18

महापुराण / गीता अध्याय / महाभारत पर्व

18 महापुराण (परंपरागत सूची), गीता के 18 अध्याय, महाभारत के 18 पर्व।

33

कोटि देवता

33 कोटि (कोटि = प्रकार/श्रेणी) देवता — 12 आदित्य, 11 रुद्र, 8 वसु, इंद्र और प्रजापति। स्रोत: वैदिक/शतपथ ब्राह्मण परंपरा।

51

शक्तिपीठ

51 शक्तिपीठ — सती के अंग-स्थलों से जुड़ी परंपरा। स्रोत: तंत्र/पुराण परंपरा (सूचियों में 51/52/108 का भेद मिलता है)।

108

उपनिषद / माला मनके

108 उपनिषद — मुक्तिका सूची के अनुसार; जप-माला में भी परंपरा अनुसार 108 मनके।