13 अखाड़े
साधु-संगठनों की निर्देशिका — परंपरा, केंद्र, इष्ट और कुंभ-भूमिका। विवरण परंपरागत/ऐतिहासिक हैं; वर्तमान पदधारियों के नाम यहाँ नहीं दिए जाते।
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी
शैव (दशनामी संन्यासी)- मुख्य केंद्र:
- प्रयागराज (दारागंज), उत्तर प्रदेश
- इष्ट:
- कपिल मुनि (इष्ट परंपरा)
- कुंभ भूमिका:
- कुंभ में शाही स्नान (अमृत स्नान) की अग्रणी परंपरा में सम्मिलित
ऐतिहासिक विवरण: प्राचीन शैव संन्यासी अखाड़ों में गिना जाता है; पंचायती (सामूहिक) प्रबंध-परंपरा के लिए जाना जाता है।
ऐतिहासिक स्रोतश्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी
शैव (दशनामी संन्यासी)- मुख्य केंद्र:
- प्रयागराज, उत्तर प्रदेश (हरिद्वार में भी प्रमुख केंद्र)
- इष्ट:
- कार्तिकेय (इष्ट परंपरा)
- कुंभ भूमिका:
- कुंभ के प्रमुख स्नान क्रम में सम्मिलित बड़ा अखाड़ा
ऐतिहासिक विवरण: शिक्षित साधुओं की अधिक संख्या के लिए प्रसिद्ध; बड़े शैव अखाड़ों में द्वितीय गिना जाता है।
ऐतिहासिक स्रोतश्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा
शैव (दशनामी संन्यासी)- मुख्य केंद्र:
- वाराणसी (हनुमान घाट), उत्तर प्रदेश; हरिद्वार में माया देवी मंदिर से संबद्ध
- इष्ट:
- दत्तात्रेय (इष्ट परंपरा)
- कुंभ भूमिका:
- साधु-संख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा अखाड़ा; नागा साधुओं की प्रमुख परंपरा
ऐतिहासिक विवरण: "जूना" अर्थात् पुराना; इसे प्राचीनतम अखाड़ों में गिना जाता है।
ऐतिहासिक स्रोतश्री पंचायती अखाड़ा अटल
शैव (दशनामी संन्यासी)- मुख्य केंद्र:
- वाराणसी, उत्तर प्रदेश
- इष्ट:
- गणेश (इष्ट परंपरा)
- कुंभ भूमिका:
- कुंभ स्नान क्रम में महानिर्वाणी के साथ सम्मिलित परंपरा
परंपरागत विवरण: प्राचीन अखाड़ों में गिना जाता है; महानिर्वाणी से घनिष्ठ संबंध की परंपरा।
परंपरागत मान्यताश्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा
शैव (दशनामी संन्यासी)- मुख्य केंद्र:
- वाराणसी, उत्तर प्रदेश
- इष्ट:
- दत्तात्रेय एवं गणेश (इष्ट परंपरा)
- कुंभ भूमिका:
- कुंभ में जूना अखाड़े के साथ स्नान की परंपरा
परंपरागत विवरण: जूना अखाड़े से निकट संबंध; आवाहन (आह्वान) नाम से प्रसिद्ध।
परंपरागत मान्यताश्री पंचदशनाम पंच अग्नि अखाड़ा
शैव (ब्रह्मचारी परंपरा)- मुख्य केंद्र:
- जूनागढ़, गुजरात (परंपरा-केंद्र); कुंभ नगरों में शिविर
- इष्ट:
- गायत्री (इष्ट परंपरा)
- कुंभ भूमिका:
- कुंभ स्नान क्रम में सम्मिलित; ब्रह्मचारी साधकों का अखाड़ा
परंपरागत विवरण: इसमें नागा दीक्षा के स्थान पर ब्रह्मचारी-परंपरा प्रमुख है।
परंपरागत मान्यताश्री पंचायती अखाड़ा आनंद
शैव (दशनामी संन्यासी)- मुख्य केंद्र:
- त्र्यंबकेश्वर (नासिक), महाराष्ट्र से संबद्ध परंपरा
- इष्ट:
- सूर्य (इष्ट परंपरा)
- कुंभ भूमिका:
- कुंभ में निरंजनी अखाड़े के साथ स्नान की परंपरा
परंपरागत विवरण: निरंजनी से घनिष्ठ; सूर्य-उपासना की इष्ट परंपरा।
परंपरागत मान्यताश्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा
वैष्णव (बैरागी)- मुख्य केंद्र:
- अयोध्या, उत्तर प्रदेश (वृंदावन में भी केंद्र)
- इष्ट:
- श्री राम / हनुमान (इष्ट परंपरा)
- कुंभ भूमिका:
- वैष्णव अनी अखाड़ों के स्नान क्रम में सम्मिलित
ऐतिहासिक विवरण: रामानंदी बैरागी परंपरा का प्रमुख अनी अखाड़ा; अयोध्या से गहरा संबंध।
ऐतिहासिक स्रोतश्री पंच दिगंबर अनी अखाड़ा
वैष्णव (बैरागी)- मुख्य केंद्र:
- अयोध्या / वृंदावन परंपरा-केंद्र
- इष्ट:
- श्री राम / श्री कृष्ण (इष्ट परंपरा)
- कुंभ भूमिका:
- वैष्णव अखाड़ों के कुंभ स्नान क्रम में प्रमुख
परंपरागत विवरण: बैरागी अनी परंपरा का बड़ा अखाड़ा; "दिगंबर" नाम वैराग्य-भाव का सूचक।
परंपरागत मान्यताश्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा
वैष्णव (बैरागी)- मुख्य केंद्र:
- अयोध्या, उत्तर प्रदेश
- इष्ट:
- हनुमान (इष्ट परंपरा)
- कुंभ भूमिका:
- वैष्णव अनी अखाड़ों में सम्मिलित; अखाड़ा-कुश्ती परंपरा से भी जुड़ाव
ऐतिहासिक विवरण: रामानंदी बैरागी परंपरा; हनुमानगढ़ी (अयोध्या) की परंपरा से संबंध बताया जाता है।
ऐतिहासिक स्रोतश्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा
उदासीन- मुख्य केंद्र:
- प्रयागराज (कीडगंज), उत्तर प्रदेश
- इष्ट:
- पंचदेव उपासना; श्रीचंद्र जी की गुरु-परंपरा
- कुंभ भूमिका:
- उदासीन परंपरा का प्रमुख अखाड़ा — कुंभ स्नान क्रम में सम्मिलित
ऐतिहासिक विवरण: उदासीन परंपरा श्रीचंद्र जी (गुरु नानक देव जी के पुत्र) से जोड़ी जाती है।
ऐतिहासिक स्रोतश्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा
उदासीन- मुख्य केंद्र:
- हरिद्वार, उत्तराखंड
- इष्ट:
- पंचदेव उपासना; उदासीन गुरु-परंपरा
- कुंभ भूमिका:
- कुंभ स्नान क्रम में सम्मिलित
ऐतिहासिक विवरण: बड़ा उदासीन अखाड़े से पृथक् होकर बनी शाखा (19वीं-20वीं शताब्दी, परंपरा अनुसार)।
ऐतिहासिक स्रोतश्री निर्मल पंचायती अखाड़ा
निर्मल- मुख्य केंद्र:
- हरिद्वार (कनखल), उत्तराखंड
- इष्ट:
- गुरु ग्रंथ साहिब के पाठ-परंपरा सहित सनातन ग्रंथों का अध्ययन
- कुंभ भूमिका:
- कुंभ स्नान क्रम में सम्मिलित; विद्या-प्रधान परंपरा
ऐतिहासिक विवरण: निर्मल परंपरा संस्कृत-अध्ययन और ग्रंथ-सेवा के लिए जानी जाती है; सिख विद्वत् परंपरा से ऐतिहासिक संबंध।
ऐतिहासिक स्रोतशब्दावली — परंपरा को समझें
अखाड़ा, मठ और संन्यास-परंपरा से जुड़े प्रमुख शब्दों के सरल अर्थ।
अखाड़ा (Akhada)
साधुओं की संगठित संस्था — साधना, ग्रंथ-अध्ययन और परंपरा-रक्षा का केंद्र। "अखाड़ा" शब्द व्यायामशाला से भी जुड़ा है; साधु-अखाड़े धार्मिक संगठन हैं।
नागा साधु (Naga Sadhu)
विशेष दीक्षा-प्राप्त संन्यासी, जो कठोर वैराग्य की परंपरा का पालन करते हैं। दीक्षा प्रायः कुंभ के अवसर पर होती है (परंपरागत विवरण)।
महंत (Mahant)
किसी मठ, मंदिर या अखाड़े की शाखा के प्रमुख को महंत कहते हैं — प्रबंध और परंपरा-पालन का दायित्व।
श्री महंत (Shri Mahant)
अखाड़े के वरिष्ठतम प्रबंध-प्रमुखों की उपाधि; पंचायती व्यवस्था में सामूहिक निर्णय की परंपरा होती है।
महामंडलेश्वर (Mahamandaleshwar)
अखाड़ों द्वारा दी जाने वाली उच्च धार्मिक उपाधि — धर्म-प्रचार और शिष्य-दीक्षा का दायित्व।
आचार्य महामंडलेश्वर (Acharya Mahamandaleshwar)
अखाड़े की सर्वोच्च धार्मिक उपाधि — अखाड़े की आध्यात्मिक दिशा का नेतृत्व (परंपरागत विवरण)।
शंकराचार्य (Shankaracharya)
चार आम्नाय पीठों के पीठाधीश्वरों की उपाधि — आदि शंकराचार्य की परंपरा से चली आ रही (परंपरागत विवरण)।
पीठाधीश्वर (Peethadhishwar)
किसी धार्मिक पीठ (गद्दी) के प्रमुख आचार्य की उपाधि।
मठ (Matha)
अध्ययन, साधना और गुरु-परंपरा का संस्थागत केंद्र — जहाँ आचार्य शिष्यों को शिक्षा देते हैं।
गुरु परंपरा (Guru Parampara)
गुरु से शिष्य तक ज्ञान के अविच्छिन्न हस्तांतरण की परंपरा — सनातन ज्ञान-प्रवाह का आधार।