मंत्र एवं स्तुतियाँ
महामृत्युंजय मंत्र
शिव · वैदिक मंत्र
वैदिक स्रोतशिववैदिक मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
📖 भावार्थ
हम तीन नेत्रों वाले शिव की उपासना करते हैं, जो जीवन को पुष्ट करते हैं। जैसे पका फल डंठल से सहज मुक्त होता है, वैसे ही हम भय और मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर अमृतस्वरूप सत्य की ओर बढ़ें।
📜 स्रोत
ऋग्वेद ७.५९.१२
🪔 पाठ-पूर्व ध्यान रखने योग्य बातें
- ✦स्वच्छ स्थान और स्वच्छ शरीर — यथासंभव स्नान के पश्चात पाठ करें।
- ✦शांत मन — कुछ क्षण गहरी श्वास लेकर मन स्थिर करें।
- ✦श्रद्धा और सम्मान — शब्दों को धीरे, स्पष्ट और भावपूर्वक बोलें।
- ✦अर्थ समझकर पाठ करना अधिक फलदायी माना गया है — भावार्थ अवश्य पढ़ें।
कौन पढ़ सकता है?
यह पाठ श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति कर सकता है — स्वच्छता, शांत मन और सम्मानपूर्ण उच्चारण ही मुख्य नियम हैं। विशेष साधना-विधियाँ (बीजमंत्र, दीक्षा, अनुष्ठान) योग्य गुरु-परंपरा से सीखें।