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मंत्र एवं स्तुतियाँ

कर्पूरगौरं करुणावतारम्

शिव · प्रार्थना

लोकप्रचलित प्रार्थनाशिवप्रार्थना

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

📖 भावार्थ

मैं कपूर के समान उज्ज्वल, करुणा के अवतार, नागों का हार धारण करने वाले शिव और माता भवानी को प्रणाम करता हूँ। वे सदैव हमारे हृदय में निवास करें।

📜 स्रोत

आरती के पश्चात प्रचलित श्लोक-परंपरा

🪔 पाठ-पूर्व ध्यान रखने योग्य बातें

  • स्वच्छ स्थान और स्वच्छ शरीर — यथासंभव स्नान के पश्चात पाठ करें।
  • शांत मन — कुछ क्षण गहरी श्वास लेकर मन स्थिर करें।
  • श्रद्धा और सम्मान — शब्दों को धीरे, स्पष्ट और भावपूर्वक बोलें।
  • अर्थ समझकर पाठ करना अधिक फलदायी माना गया है — भावार्थ अवश्य पढ़ें।

कौन पढ़ सकता है?

यह पाठ श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति कर सकता है — स्वच्छता, शांत मन और सम्मानपूर्ण उच्चारण ही मुख्य नियम हैं। विशेष साधना-विधियाँ (बीजमंत्र, दीक्षा, अनुष्ठान) योग्य गुरु-परंपरा से सीखें।

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