मंत्र एवं स्तुतियाँ
शान्ताकारं भुजगशयनम्
विष्णु · प्रार्थना
लोकप्रचलित प्रार्थनाविष्णुप्रार्थना
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥ लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्। वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
📖 भावार्थ
मैं शांत स्वरूप, शेषनाग पर विराजमान, कमलनाभ, जगत के आधार और माता लक्ष्मी के स्वामी भगवान विष्णु को प्रणाम करता हूँ।
📜 स्रोत
प्रचलित विष्णु ध्यान-श्लोक परंपरा
🪔 पाठ-पूर्व ध्यान रखने योग्य बातें
- ✦स्वच्छ स्थान और स्वच्छ शरीर — यथासंभव स्नान के पश्चात पाठ करें।
- ✦शांत मन — कुछ क्षण गहरी श्वास लेकर मन स्थिर करें।
- ✦श्रद्धा और सम्मान — शब्दों को धीरे, स्पष्ट और भावपूर्वक बोलें।
- ✦अर्थ समझकर पाठ करना अधिक फलदायी माना गया है — भावार्थ अवश्य पढ़ें।
कौन पढ़ सकता है?
यह पाठ श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति कर सकता है — स्वच्छता, शांत मन और सम्मानपूर्ण उच्चारण ही मुख्य नियम हैं। विशेष साधना-विधियाँ (बीजमंत्र, दीक्षा, अनुष्ठान) योग्य गुरु-परंपरा से सीखें।