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12 ज्योतिर्लिंग

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

परंपरागत सूची में 2वाँ ज्योतिर्लिंग — श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश)

⏱️ एक मिनट में जानें

मल्लिकार्जुन — आन्ध्र प्रदेश के श्रीशैलम पर्वत पर, कृष्णा नदी के तट पर — दूसरा ज्योतिर्लिंग है। यहाँ की विशेषता युगल-उपासना है: मल्लिका (पार्वती) + अर्जुन (शिव) — शिव-शक्ति एक ही नाम में। श्रीशैलम उन विरल क्षेत्रों में है जो ज्योतिर्लिंग भी है और शक्तिपीठ-परंपरा (भ्रमराम्बा देवी) भी — शैव और शाक्त धाराएँ यहाँ एक परिसर में मिलती हैं। कथा में शिव-पार्वती अपने रूठकर दक्षिण आए पुत्र कार्तिकेय के निकट रहने यहाँ आए। श्रीशैलम का उल्लेख अनेक पुराणों और तमिल-कन्नड़-तेलुगु भक्ति-साहित्य में है।

📖 विस्तार से समझें

पौराणिक कथा (शिव पुराण परंपरा)

गणेश के पहले विवाह से रुष्ट होकर कार्तिकेय क्रौञ्च पर्वत (दक्षिण) चले गए। पुत्र-वियोग में शिव-पार्वती उनके समीप रहने श्रीशैल आए — पर्व-पर्व पर उनसे मिलने की परंपरा कथा में है। पार्वती (मल्लिका) सहित अर्जुन (शिव) रूप में यहाँ वास — "मल्लिकार्जुन" (शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता — पौराणिक परंपरा)। मल्लिका का अर्थ चमेली भी है — मल्लिका-पुष्पों से अर्चित अर्जुन-लिंग, यह दूसरा परंपरागत निर्वचन है।

कथा का भाव पारिवारिक है: यह ज्योतिर्लिंग "माता-पिता के वात्सल्य" का तीर्थ है — रूठे सन्तान के पीछे स्वयं चले आने वाले माता-पिता। दक्षिण की परंपरा में श्रीशैलम को इसीलिए विशेष कोमल भाव से देखा जाता है।

मन्दिर, परंपरा और इतिहास

श्रीशैलम मन्दिर-परिसर की प्राचीरें और गोपुरम् विजयनगर-काल की समृद्ध शिल्प-परंपरा दिखाते हैं; कृष्णदेवराय के अनुदान अभिलेखों में दर्ज हैं (ऐतिहासिक स्रोत)। छत्रपति शिवाजी की श्रीशैल-यात्रा और गोपुर-निर्माण की परंपरा प्रसिद्ध है (परंपरागत/ऐतिहासिक विवरण)।

यह क्षेत्र आदि शंकराचार्य की साधना-परंपरा से भी जुड़ा है — "शिवानन्दलहरी" की रचना श्रीशैल में मानी जाती है (परंपरागत मान्यता)। भ्रमराम्बा देवी का मन्दिर परिसर में ही है — देवी ने भ्रमरी (भौंरी) रूप धर अरुणासुर का वध किया, यह शाक्त कथा है (देवी-पुराण परंपरा)। वीरशैव परंपरा में भी श्रीशैलम प्रमुख केन्द्र है — यह बहु-धारा संगम इस तीर्थ की पहचान है।

पर्व एवं दर्शन-परंपरा

  • महाशिवरात्रि ब्रह्मोत्सव — सबसे बड़ा पर्व।
  • नवरात्रि में भ्रमराम्बा देवी के विशेष उत्सव (शाक्त परंपरा)।
  • कार्तिक/श्रावण अभिषेक-परंपराएँ; कृष्णा (पाताल-गंगा) स्नान की रीति।

🔬 गहन अध्ययन

भूगोल और यात्रा

स्थान: श्रीशैलम, नल्लमला पहाड़ियाँ, जिला नन्द्याल (आन्ध्र प्रदेश); कृष्णा नदी पर विशाल श्रीशैलम बाँध। निकट नगर: कुरनूल/हैदराबाद (सड़क-मार्ग)। घना वन-क्षेत्र — नल्लमला टाइगर रिज़र्व का अंग।

मिथक-बनाम-इतिहास / परंपरा-भेद

श्रीशैलम की भ्रमराम्बा शक्तिपीठ-गणना सूची-भेद का विषय है (अष्टादश शक्तिपीठ परंपरा में स्थान निश्चित; 51-सूची में भेद) — सूची-भेद परंपरा-स्वभाव है, विवाद नहीं।

कथाएँ शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता) की परंपरा से — श्रद्धा-कथा के रूप में; ऐतिहासिक विवरण अभिलेख-आधारित। अंतिम समीक्षा: 2026-07-25 · आचार्य-समीक्षा लंबित।

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