सनातन ज्ञान
ज्ञान संसार

मांडूक्य उपनिषद्

मांडूक्य उपनिषद्

ओम् और चेतना की अवस्थाओं का ज्ञान

पढ़ने का समय

30 मिनट

श्लोक/आयत

12

अध्याय/भाग

1

काल अनुमान

ईसा पूर्व 800-600

लेखक

ऋषि मांडूक्य

स्रोत

अथर्ववेद

परिचय

मांडूक्य उपनिषद् अथर्ववेद का सबसे छोटा उपनिषद् है। इसमें केवल 12 श्लोक हैं। लेकिन इसका महत्व अपरिमित है। यह उपनिषद् ओम् (ॐ) और चेतना की विभिन्न अवस्थाओं पर विस्तृत विचार प्रदान करता है।

इस उपनिषद् के अनुसार, ओम् चारों अवस्थाओं (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय) का प्रतीक है। प्रत्येक अवस्था ओम् के एक अक्षर से जुड़ी है। यह उपनिषद् हमें सिखाता है कि सभी अवस्थाओं से परे एक चौथी अवस्था (तुरीय) है जो सच्चे ज्ञान की अवस्था है।

उपनिषद्ओम्चेतनाध्यानसंस्कृत