सनातन ज्ञान
ज्ञान संसार

ईश उपनिषद्

ईशावास्य उपनिषद्

दिव्य सत्ता और त्याग का ज्ञान

पढ़ने का समय

45 मिनट

श्लोक/आयत

18

अध्याय/भाग

1

काल अनुमान

ईसा पूर्व 1000-800

लेखक

ऋषि याज्ञवल्क्य

स्रोत

यजुर्वेद

परिचय

ईश उपनिषद् यजुर्वेद का प्रथम और सबसे छोटा उपनिषद् है। इसमें केवल 18 श्लोक हैं, परंतु इसमें उपनिषदों का सार निहित है। इस उपनिषद् को "ईशावास्य उपनिषद्" भी कहते हैं क्योंकि यह यजुर्वेद के अंतिम भाग में दिया गया है।

यह उपनिषद् कहता है कि सभी कुछ ईश्वर से व्याप्त है। हमें त्याग करते हुए भोग करना चाहिए। आसक्ति न रखते हुए अपने कर्तव्य को पूरा करना ही जीवन का सार है। यह उपनिषद् कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग सभी को समाहित करता है।

उपनिषद्त्यागदिव्यतासंस्कृत