तैत्तिरीय उपनिषद्
तैत्तिरीय उपनिषद्
ब्रह्मविद्या और आनंद का संशोधन
पढ़ने का समय
75 मिनट
श्लोक/आयत
119
अध्याय/भाग
3
काल अनुमान
ईसा पूर्व 800-600
लेखक
ऋषि वैयाघ्र
स्रोत
यजुर्वेद (कृष्ण यजुर्वेद)
परिचय
तैत्तिरीय उपनिषद् यजुर्वेद (कृष्ण यजुर्वेद) का एक महत्वपूर्ण उपनिषद् है। इसमें तीन भाग हैं - शिक्षावल्ली, ब्रह्मानंदवल्ली, और भृगुवल्ली। यह उपनिषद् क्रमबद्ध तरीके से ब्रह्मविद्या को समझाता है। इसमें ब्रह्म का परिचय, उसके गुण, और उसके साथ संबंध के विभिन्न स्तरों का विवरण दिया गया है।
तैत्तिरीय उपनिषद् का सबसे प्रसिद्ध योगदान है "पंचकोष" का सिद्धांत - अन्नमय कोष, प्राणमय कोष, मनोमय कोष, विज्ञानमय कोष, और आनंदमय कोष। यह सिद्धांत बताता है कि आत्मा विभिन्न आवरणों से ढकी होती है, और सबसे भीतर आनंद की अवस्था होती है।
उपनिषद्ब्रह्मविद्याआनंदकोषसंस्कृत