सनातन ज्ञान
ज्ञान संसार

मुंडक उपनिषद्

मुंडकोपनिषद्

सर्वोच्च ज्ञान का उपदेश

पढ़ने का समय

60 मिनट

श्लोक/आयत

64

अध्याय/भाग

3

काल अनुमान

ईसा पूर्व 800-600

लेखक

ऋषि श्वेतकेतु

स्रोत

अथर्ववेद

परिचय

"मुंडक" का अर्थ है "मुड़ाना" या "शेविंग"। यह उपनिषद् उपनिषदों का राजा कहा जाता है। इसमें तीन मुंडक (भाग) हैं। यह अथर्ववेद से संबंधित है। इस उपनिषद् में दो प्रकार के ज्ञान का वर्णन है - अप्रा विद्या (निम्न ज्ञान) और परा विद्या (परम ज्ञान)।

मुंडक उपनिषद् का मुख्य संदेश यह है कि ब्रह्म से ही सब कुछ उत्पन्न होता है, ब्रह्म में ही सब कुछ लीन हो जाता है, और ब्रह्म ही सब कुछ है। यह ज्ञान ही मोक्ष का साधन है। लगभग सभी प्रमुख उपनिषदों में मुंडक उपनिषद् का ज्ञान प्रतिबिंबित होता है।

उपनिषद्ब्रह्मविद्याज्ञानमोक्षसंस्कृत