आइतरेय उपनिषद्
आइतरेय उपनिषद्
आत्मा का उत्पत्ति और चेतना की उत्कर्षता
पढ़ने का समय
45 मिनट
श्लोक/आयत
48
अध्याय/भाग
3
काल अनुमान
ईसा पूर्व 800-600
लेखक
ऋषि महीदास
स्रोत
ऋग्वेद
परिचय
आइतरेय उपनिषद् ऋग्वेद का उपनिषद् है। इसमें तीन अध्याय हैं और इसमें आत्मा की उत्पत्ति और महत्ता पर विस्तार से चर्चा की गई है। इस उपनिषद् का नाम महीदास ऋषि के पुत्र आइतरेय के नाम पर रखा गया है।
यह उपनिषद् कहता है कि शुरुआत में केवल आत्मा (ब्रह्म) था। आत्मा से ही सब कुछ सृष्टि हुई। आत्मा ही सभी प्राणियों के अंदर रहती है। आत्मा ही सबकुछ देखती है, सुनती है, और जानती है। यह उपनिषद् मन की शक्ति और चेतना के महत्व को भी समझाता है।
उपनिषद्आत्माचेतनासृष्टिसंस्कृत