अथर्ववेद
अथर्ववेदः
चौथा वेद, लोक कल्याण और व्यावहारिक ज्ञान का वेद
पढ़ने का समय
240 मिनट
श्लोक/आयत
5987
अध्याय/भाग
20
काल अनुमान
ईसा पूर्व 1000-800
लेखक
अथर्वा और अंगिरा ऋषि
स्रोत
वैदिक परंपरा
परिचय
अथर्ववेद चौथा और सबसे युवा वेद है। इसमें 5987 मंत्र हैं जो 20 कांडों में विभाजित हैं। यह वेद अन्य तीनों वेदों से अलग है क्योंकि इसमें जीवन के व्यावहारिक पहलुओं पर जोर दिया गया है। अथर्ववेद में औषधि, रोग निवारण, लंबी आयु, सुख-समृद्धि, विवाह, मृत्यु और आत्मशांति के विषय हैं। यह वेद आम जन के लिए लिखा गया है और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित है।
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